Monday, March 8, 2010

युद्ध का सत्य

मैं मानता हूं मित्र
कि जिस ओर खड़े हो तुम
वहीं है सत्य
वहीं है धर्म
वहीं है जगदीश्वर भी
मगर जब तक महाभारत की घोषणा न हो जाए
कृष्ण का कर्त्वय होता है युद्ध टालना

तीर तलवार विध्वंस की भाषा जानते हैं
गोली का सत्य केवल मृत्यु देना है
और युद्ध का परिणाम नहीं होता जय या पराजय
होता है परिणाम
अवशेष
टूटे हुए मकान
डरे हुए मन
सिमटे हुए मनुष्य
अभिमन्यु हो – द्रोण हो – या हो भीष्म
सबको होना होता है अन्याय का शिकार
धृतराष्ट्र को भी कोसना पड़ता है अपने अन्धेपन को
युधिष्ठर को भी भोगना पड़ता है नरक
जब कभी भी किया जाता है सत्य के लिए युद्ध
सत्य भी हो जाता है दफ़न शवों के ढेर के नीचे
फिर कोई नहीं बचता जो कह सके कि
सत्य की हुई है विजय

कोई भी महाभारत निर्णय नहीं कर पाता सत्य का
मगर जब कभी भी होता है सत्य की द्रौपदी का अनादर
महाभारत निश्चित हो ही जाता है
द्रौपदी का शील स्वयं प्रमाण है सत्य का
उसका दांव पर लगना ही उसका अनादर है

इसीलिए कहता हूं मित्र सत्य को दांव पर मत लगाओ
सत्य का अनादर जन्म देगा महाभारत को
और महाभारत होना सत्य की मृत्यु है

5 comments:

हरकीरत ' हीर' said...

शायद किसी को सम्बोधित कर लिखें हैं आपने ये प्रेरणा दायक भाव ....सत्य जीतता जरुर है क्योंकि सच्चाई के साथ ईश्वर रहता है ......!!

सु-मन (Suman Kapoor) said...

सत्य भी हो जाता है दफ़न शवों के ढेर के नीचे
फिर कोई नहीं बचता जो कह सके कि
सत्य की हुई है विजय

काश सभी समझ पाते सत्य की परिभाषा तो आज सब तरफ अमन होता
सुमन’मीत’
नई रचना – ढलती शाम

Unknown said...

jai or vijay satya se pari hai satya satya hai

aarkay said...

सत्य सत्य है
सत्य नित्य है
अजर अमर है

युद्ध के घातक दुष्परिणामों की ओर ध्यान दिलाने वाली एक सुंदर रचना ! युद्ध का टल जाना ही श्रेयस्कर है !

Akhilesh Bharti said...

यह कविता कई घटनाओं के बाद अचानक जन्मी। मन्नू भण्डारी की कहानी सज़ा, विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों में बहस से मारकाट तक पहुंचने के दृष्य, राष्ट्रीय व राजकीय राजनीति में अलग अलग दलों के दावे, अंतर्राष्ट्रीय मंचो पर बातचीत और विवादों का खोखलापन, खेल, कला... सब क्षेत्रों में भाई भतीजावाद... और भी न जाने क्या क्या।
मैं स्वयं इस बात को मानता था और हूं कि - सत्यमेव जयते। पर उपरोक्त घटनाओं के बाद सत्य को दांव पर लगा कर युद्ध से विरक्ति हो गई। यह युद्ध सब जगह है -- हरेक मन के कोने से लेकर, परिवार, मित्रता, संस्था, राज्य, राष्ट्र एवं विश्व स्तर तक।