हे परमेश्वर ! आप सर्वव्यापक, सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान् तथा न्यायकारी हैं। आपने ही मुझे यह जीवन प्रदान किया है। आप के कारण ही मैं विचारने, बोलने तथा कर्मों को करने में समर्थ हूँ। प्रतयेक क्षण मन, वाणी और शरीर से किए जाने वाले समस्त कर्मों को आप जानते हैं। आप से छुप करके मैं कोई भी काम नहीं कर सकताष आप की अनुभूति मेरी बुद्धि में प्रतयेक क्षण बनी रहे जिससे मैं बुरे कर्मों से और उनके दुःखरूप फल से बचकर सुख-शान्ति को प्राप्त करूँ, ऐसी आप से प्रार्थना है।
-दर्शन योग महाविद्यालय
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1 comment:
निश्चय ही स्मरण करने योग्य वाक्य है , उस ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए !
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